उट्ठा हुआ लौड़ा अपनी मां की फुद्दी डाला रे !

[ This is an honest translation of a Marwari obscene song(s), articulated openly at the Holi festival. It is a folksong, and bears a historical heritage ]

उट्ठा हुआ लौड़ा अपनी मां की फुद्दी डाला रे

अंधेरी कोठी में चोदा,

भीतर घाला रे ( घाला = घुसेड़ा )

फुद्दी माता की ( फुद्दी = चूत )

महीनो फागण को !

हाँ – हाँ मां की फुद्दी में घुसाय पेला रे

हाँ-हाँ मां की चूत में फंसाय खेला रे

भोसड़ी माता की! ( भोसड़ी = चूत )

कंवारी छोरी ने तैने ले ली गोदी रे

गाँड उठा, भक लंड घुसेड़ा

छोरी चोदी रे

भोसकी छोरी की ! ( भोसकी = चूत )

कंवारी छोरी की फुद्दी लागे चोखी रे

फुद्दी छोरी की

अंधेरी कोठी में पूरो घुसियों कोनी रे ( कोनी = नहीं )

पाछो डालो, कसियो कोनी, फंसियो कोनी रे

छोरी बोले रे !

उठा के लौड़ा, मादर-चोदन ने

महीनो फागण को !

रात दारू पी ली तन्ने, चोदन साती चाल्यो रे ( तन्ने = तूने, चोदन साती = चोदने के लिए )

अगल-बगल मां-बेटी रगड़ी, भीतर घाल्यो रे ( घाल्यो = डाला )

लौड़ो मोटोड़ो ( मोटोड़ो = मोटा-मोटा )

दोनों ही छोरी के मुंह में जोरी डाल्यो रे ( जोरी = जबर्दस्ती )

मां ने चोदी रे, मां ने चोदी रे

छोरी के सामे मां ने चोदी रे ( सामे = सामने )

महीनो फागण को ! !

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charudatt

Male, 54-years; Pretty sexy. I usually Watch obscene dances and write lyrics in Hindi for such performances. About 14 sexy poems have been published on mastaram.net कामुक पुरुष, 54 वर्ष। नृत्य-नाट्य व नाटकों के लिए अश्लील गीत व संवाद लेखन; कोई 14अश्लील कविताएं मस्तराम.नेट ( mastaram.net ) पर प्रकाशित