ओह, लालाजी! धीरे-धीरे !!

दादा सेठ हाजी कलीमुद्दीन मोटे माथे,मोटे पेट, और मोटे लौड़े वाले गैंडा पहलवान हैं । वे 58 वर्ष की उम्र में भी मस्त कड़क जवान छोकरी पर चढ़ कर उसे बुरी तरह रौंदते हैं । या तो वे कुश्ता खाते होंगे या उन्होंने कोई ट्रासप्लांट करा रखा होगा; कुछ भी हो मैं उनके लिए महीने में एक नई चिड़िया पेश कर ही देती हूँ । मैं भी इसी धंधे में पल कर बड़ी हुई और अब रईसों के लिए नायाब माल पेश करती हूँ।माल ताज़ा होना चाहिए, न कि चखा हुआ इसलिए मुझे नेपाल, बांगलादेश, श्रीलंका तक जाल फेंकना पड़ता है। कश्मीर की कली और संथाल आदिवासी छोकरी उनकी खास पसंद है। उन्हें कभी सिख गर्ल तो कभी क्रिश्चियन कन्या की तलब रहती है।उम्र कम हो और छोरी मोटीताज़ी हो वो ज्यादा पसंद।

उनका फोन आ गया, बोल रहे: ‘मालती रानी है कोई मुर्गी, कोई चिक , चिड़िया या कबूतरी ? ‘जवाब: ‘ अरे आप आइये ना! दो हैं – –  मिस मेरी, क्रिस्टन और कुमारी टन्नोरानी , वैष्णव हिन्दू ; मेरी पतली-छरहरी है और टन्नोरानी टन-टनाटन  मोटी मटंग।’ उम्र?’ – – जवाब दिया ‘ हजूर, आपके शौक को देखते सिर्फ 16 – 17 साल की हैं  लेकिन देखने में 13-14 जैसी लगती हैं, आपको मज़ा आजाएगा।’ वो बोले : ‘ ठीक है पर मेरी एक चचेरी बहिन के लौंडे के लिए एक बड़ी उम्र की शादीशुदा और बच्चेवाली औरत भी चाहिए , लौंडा बिगड़ा हुआ है; दिल में वो मां को चोदना चाहता है – – तू चुदवा लेगी? सही बोल? लौंडा 17 का ही है। ‘ मैंने कहा– मैं तो बिज़नस में लगी हुई हूँ पर मेरी एक फ्रेंड ३८ की है, उसके बच्चा भी है ; लेकिन क्या आज ही? वो हंसने लगे , बोले- आज नहीं तो कल !

मिस मेरी स्कर्ट में थी और टन्नोरानी घेरदार सलवार में । दोनों को मैंने घुट्टी पिला दी थी कि ‘ये अरब के शेख हैं और बॉलीवुड फिल्मों को फ़ाइनेंस करते हैं, इनके मुंबई में तीन स्टूडिओ भी हैं ; तुम लोग उनका शौक पूरा कर दो तो फिल्मलाइन में तुम्हारी एंट्री पक्की। वैसे आज भी ये तुम्हें बड़े होटल में खिलाये-पिलाएंगे, गिफ्ट्स देंगे और तुम्हारा शौक और नखरा पूरा करेंगे। . . . वैसे तुम्हन को पता ही है कि वो तुम्हारे साथ . . . . .!!’ दोनों मुझसे चिपट गईं और खिलखिला पड़ीं।

हाजी सेठ जैसे ही आए अश्लील हो गए । दोनों गुड़िया रानियों के सिर के बालों पर, गालों पर, और चूतडो पर हाथ मारा और बोले– आओ, बुलबुलों !! मेरी गोद चढ़ो । टन्नो खड़ी रही पर मिस मेरी धम्म से उनकी गोद में अदा से लुढ़क गई ; सेठ का हाथ उसकी पिंडलियाँ, टखने और चूतड़ पर मौज से फिरने लगा । बोले- – गुड़िया, तुमको तो हॉलीवुड की क्वाण्टिगो में प्रियंका चोपड़ा के साथ लगा दूंगा पर वहाँ नंगा खेल फिल्माते हैं और ले अब मैं तेरे को दिखाता हूँ कि असल में वहाँ कैसे घप नंगे हो कला का करतब करते हैं।’ यह कहने के साथ ही उन्होंने टन्नो की सलवार के पिछवाड़े अंगुली की, फिर  उसकी कुर्ती उठा    भक से  टन्नो ”बिटिया” की गांड टटोलने लगे। बोले- ;वाह, क्या मस्त चौड़ी उठी हुई मस्तानी गांड है तेरी, वाह, तेरी सलवार फाड़ अभी नंगी करता हूँ , तेरी तो . . .’ सेठ जोश में आ नंगा हो गया और अपनी एक टांग ऊंची कर टन्नो की मोटी ताज़ी जांघ से सटा दी।उसका एक हाथ मिस मेरी की गांड पर चिपक घिस्से लगाने लगा। वो दो-दो बिटियाओं के गरम माल को मसोस-मसोस मज़ा ले रहा था और लेना भी चाहिए। अब तो दोनों छोरियाँ खुलकर नंगी हो गईं थीं और सिर्फ दिखावे की शरम कर रही थी। मैं भी नंगी हो गई औरमैंने मिस मेरी की चूत को अपनी चूत  से सटा लिया।सेठ बोला– भेनचोद! इन दोनों को कहो कि वो मेरे लिए अपनी-अपनी गांड उठा मुझे दिखाये । मैंने  दोनों कुमारियों को घुटनों के बल झुकाया और सेठ दोनों की गांडों के गोलकों को फैला-फैला भीतर अंगुली करने लगा। उसका लंड भभक कर फूल गया था जिसे उसने बाद में मिस मेरी के मुंह में घुसेड़ डाला। उसका मोटा अंडकोश लंड के नीचे झूल रहा था। अंडकोश भी बहुत मोटा, काला और भद्दा था। मैंने टन्नो को कहा – – बेटी, इस वक्त तू लाला सेठ का आण्ड चाट, चूँस और बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद ले। चूँस बेटी , शाबाश। ‘  टन्नो ने लाला कमरु मियां का अंडकोश अपने हाथों मे ले पिंच किया तो एक आह लाला के मुंह से भी निकल गई और मिस मेरी  की तो मुख चोदाई पक्की हो गई।थोड़ी देर में ये दोनों लड़कियां पूरी बेशर्म हो घोड़ी की तरह हिनहिनाते हुए सेठ का लौड़ा बारी-बारी अपने मुंह में ले कमरू मियां की पुख्ता जवानी को जोश दिलाने लगी।मियां ने दोनों को एकसाथ उलटी पटका और पहले पहल टन्नो की गांड मारने लगा। सेठ उसकी मोटी गांड के किनारों को दबोचे-दबोचे मुट्ठी मार रहा था जबकि उसका लौड़ा ठीक गांड के छेद में घुस कर दहाड़ रहा था।सेठ झड़ा नहीं; वो ४० मिनट तक सिर्फ उस मोटकली की गांड बजा रहा था। फिर टन्नो के पेट पर मिस मेरी को बिठा उसकी कोमल फुद्दी में मुंह मारा और चूत की फांक के एक हिस्से को दांतों में डाल खींचा। कसम से किसमतवाला ही ये मज़ा ले सकता है क्योंकि दोनों छोरियाँ  भी अब मदमस्त हो गई थीं ।

मेरी की फुद्दी बहुत संकरी और पान के पत्ते सी थी, सेठ ने पहले बाहर से चाट कर उसका चस्का लिया; फिर देखा कि अंगुली घुस सकती है या नहीं। नहीं घुस रही थी इसलिए खूब सारा थूक उस पर मला और  फिर एक तिनका उसकी फुद्दी में घुसाया, ओह, वो चींखी; तब मैंने खुद उसकी चूत के किनारों को चौड़ा किया और टन्नो ने मिस मेरी की फुद्दी में अपनी एक छोटी वाली अंगुली गड़ाई जिससे मिस मेरी की फुद्दी का छेद कुछ चौड़ा हो गया, तभी टन्नों चिल्लाई — लालाजी , घुसेड़ मारो लंड इसकी में ; मेरी को दर्द न हो इसलिए मैंने उसका गला पकड़ मुंह व ओटों पर कस कर हथेली रख दी। लाला को जबर्दस्त जोश आया और भक से उसने अपना मूसल इस छोटी छोरी की चूत में गड़ागड़ गाड़ मारा। दर्द हुआ और मेरी की आँखों से आँसू निकल पड़े पर लाला ने छोड़ा नहीं; वो तेज -टोप घोड़े की तरह चढ़ाई और ऊंचाई मारता रहा, जबकि लड़की तिलमिला रही थी। छोरी की तो बस सिसकियाँ चढ़ गई थी और सांसें तेज-तेज। मैंने लाला जी का लौड़ा अपने हाथ सेउसकी चूत से निकाला और टन्नों की चूत में डालने का इशारा किया। लाला ने कहा इसे घोड़ी बना चोदूंगा तो दर्द कम होगा। टन्नो घोड़ी बनी और लाला ने सवारी की। उसने टन्नों की गांड़ को चौड़ी किया और मैंने व मिस मेरी ने टन्नो की चूत की फाँकों को; किला फतह हो गया। लाला हाजी कमरूद्दीन , ५८ वर्ष, अब चोद रहा था १७ साल की छोरी,वाह! वाह जी वाह!!

इस के बाद लाला का एक और शौक का खेला हुआ; वो दोनों के मम्मों को बुरी तरम मसलने-मरोड़ने लगा और यही नहीं उनमें दर्द हो इसलिए वो अपने साथ कुछ खास तरह की सूइयाँ लाया था उन्हें उन दोनों की चूँचियों पर चुभोया।अहह, आह! आह!! aaaahh!!!– लेकिन सिर्फ बिलबिलाना हुआ , खून नहीं निकला। सेठ मेरी के पेट पर चढ़ गया और चढ़े-चढ़े उसके कोमल मम्मों का मांस दाँत से काटने लगा, खींचने लगा। और ये तो शुरूआत थी । अभी तो इन दोनों बालाओं की गांड का तड़ातड़ बाजा भी बजना था। सो मार चटाक, चटाक-चटाक, हुर्र ठोंक-ठोंक, भोंक -भोंक, झोंक-झोंक मारापीटी हुई । गांड जब पूरी तरह दोनों की लाल-लाल हो गई तब मैंने कहा, बस, लाला जी, छोड़ दो, अबोध कन्याएँ है– फिर कभी दर्द की दावत दे-देना। लाला सेठ कमरूद्दीन खुदा का नेक बंदा था उसने अपने सुख और मज़े की परवाह न की और  दोनों बालाओं के सिर व ललाट पर हाथ फेर अपने लंड का आशीर्वाद दिया।

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